avalw
⚲
BUSINESS · IN

जीएसटी 2.0 का असर, चार स्लैब से घटकर सरल हुई कर व्यवस्था, जानिए नई दरें

इशा राव इशा राव isharaoreports.avalw.com · 1k reads Respect0 Save Share Read only
READS333live count PUBLISHED6 Sept2026 READING TIME3 min672 words LANGUAGEHindi
AI CITATIONS? Gathering data

भारत में 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी 2.0 सुधार ने कर स्लैब को सरल बनाकर 0, 5, 18 और 40 प्रतिशत कर दिया है। जानिए कौन सी चीजें किस स्लैब में आती हैं और इस बदलाव का मकसद क्या है।

ALSO ON AVALWRead this on AVALWOpen

अक्सर जीएसटी की दरें और स्लैब आम लोगों के लिए उलझन का विषय बन जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस लेख में हम आसान भाषा में समझेंगे कि जीएसटी 2.0 में क्या बदला है, अब कितने स्लैब हैं, कौन सी चीज किस दर पर आती है और इस पूरे सुधार के पीछे सरकार का मकसद क्या रहा है।

चार से घटकर सरल हुआ ढांचा

इस सुधार से पहले जीएसटी की व्यवस्था कई अलग-अलग स्लैब में बंटी हुई थी, जिससे वर्गीकरण और अनुपालन दोनों जटिल हो जाते थे। जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद इस पूरे ढांचे को समेटकर एक सरल रूप दिया गया। खासतौर पर 12 और 28 प्रतिशत वाले स्लैब को काफी हद तक हटा दिया गया, जिससे व्यवस्था अधिक स्पष्ट हो गई।

इस बदलाव का सबसे बड़ा उद्देश्य कर ढांचे को सरल बनाना और कारोबारियों के लिए अनुपालन की जटिलता को कम करना था। जब दरें साफ और कम हों, तो व्यापारियों को यह तय करने में आसानी होती है कि किस वस्तु पर कितना कर लगेगा। इसके साथ ही खपत को बढ़ावा देना और आर्थिक वृद्धि को गति देना भी इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहा।

नए स्लैब क्या हैं

बाजार में बिकने वाला रोजमर्रा का सामान। नई कर व्यवस्था में जरूरी चीजों को कम दर वाले स्लैब में रखा गया है।
बाजार में बिकने वाला रोजमर्रा का सामान। नई कर व्यवस्था में जरूरी चीजों को कम दर वाले स्लैब में रखा गया है।

नई व्यवस्था में मुख्य रूप से चार दरें रह गई हैं। पहली शून्य प्रतिशत यानी छूट वाली श्रेणी, दूसरी 5 प्रतिशत जो जरूरी वस्तुओं के लिए है, तीसरी 18 प्रतिशत जो मानक दर मानी जाती है और चौथी 40 प्रतिशत जो विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर लागू होती है। पहले 12 प्रतिशत वाली चीजें अब 5 या 18 प्रतिशत में आ गई हैं।

इसी तरह जो वस्तुएं पहले 28 प्रतिशत के ऊंचे स्लैब में आती थीं, उन्हें अब या तो 18 प्रतिशत या फिर 40 प्रतिशत की श्रेणी में रखा गया है। इस तरह अधिकांश रोजमर्रा की जरूरी चीजों पर कर का बोझ कम हुआ है, जबकि विलासिता की वस्तुओं पर ऊंची दर बनी हुई है, ताकि संतुलन बना रहे।

रोजमर्रा की चीजें और 5 प्रतिशत स्लैब

आम आदमी की जेब से सीधे जुड़ी कई चीजें अब 5 प्रतिशत के स्लैब में आती हैं। इनमें बालों का तेल, टूथपेस्ट, डेयरी उत्पाद, रसोई के बर्तन, सैनिटरी नैपकिन, छपाई से जुड़ी सामग्री, मेडिकल ऑक्सीजन और थर्मामीटर जैसी वस्तुएं शामिल हैं। इनका कम दर वाले स्लैब में आना घरेलू बजट के लिहाज से राहत की बात मानी जा रही है।

इसके अलावा शून्य प्रतिशत यानी छूट वाली श्रेणी भी बनी हुई है, जिसमें बुनियादी जरूरत की कई वस्तुओं को रखा गया है। इस श्रेणी में आने वाली चीजों पर कोई कर नहीं लगता, जिससे समाज के हर तबके तक जरूरी सामान बिना अतिरिक्त बोझ के पहुंच सके। यह व्यवस्था कमजोर आय वर्ग के लोगों के लिए खासतौर पर मददगार मानी जाती है।

मानक दर 18 प्रतिशत

18 प्रतिशत की दर को मानक दर के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में वस्तुएं और सेवाएं आती हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऑटोमोबाइल और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इसी श्रेणी में रखे गए हैं, जिनमें एयर कंडीशनर, 32 इंच से बड़े टेलीविजन और डिशवॉशर जैसे उत्पाद शामिल हैं। यह श्रेणी व्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है।

विलासिता और हानिकारक वस्तुओं पर 40 प्रतिशत

सबसे ऊंची 40 प्रतिशत की दर उन वस्तुओं पर लगाई गई है, जिन्हें विलासिता या सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है। इसमें कोल्ड ड्रिंक्स, तंबाकू और पान मसाला, 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली ताकतवर मोटरसाइकिलें, साथ ही कसीनो और गेमिंग जैसी गतिविधियां शामिल हैं। ऊंची दर के जरिए ऐसी खपत को हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया है।

आम आदमी और कारोबार पर असर

इस सुधार का सीधा असर दो स्तरों पर दिखता है। एक ओर आम उपभोक्ता के लिए जरूरी चीजें अपेक्षाकृत सस्ती हुई हैं, जिससे रोजमर्रा के खर्च में कुछ राहत मिली है। वहीं दूसरी ओर कारोबारियों के लिए कम और स्पष्ट स्लैब के चलते कर की गणना और रिटर्न भरने की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हो गई है।

आगे की राह

कुल मिलाकर जीएसटी 2.0 को एक ऐसे कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बढ़ता है। आने वाले समय में इसका असल असर खपत के आंकड़ों और कारोबारी अनुभव से ही साफ होगा। फिलहाल यह सुधार आम लोगों और व्यापार जगत, दोनों के लिए एक अहम बदलाव के रूप में सामने आया है।

3 responses

स्पष्ट और अच्छा लिखा.

2

कर सुधार का अच्छा विश्लेषण.

1

यहाँ कर सुधार के बारे में काफी कुछ सीखा.

1
इशा राव
Follow this desk
इशा राव
Create a free account to follow इशा राव. New stories land in your feed, and you can save any of them to your own reading lists.
Your library & lists →
इशा राव
WRITTEN BY THE AUTHOR
इशा राव 2026-09-06 · 3 min read · 333 reads
View profile →
VERIFY THIS STORY
ASK AI
इशा राव Keep subscribing to इशा रावHer next filing reaches you the moment it publishes, on her own subdomain.
Up next
More
Statistics Search Become a creator Alliances About Terms Privacy