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यूपीआई के दस साल, दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान मंच बना भारत का डिजिटल आधार

इशा राव इशा राव isharaoreports.avalw.com · 1k reads Respect0 Save Share Read only
READS578live count PUBLISHED4 Sept2026 READING TIME4 min701 words LANGUAGEHindi
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने दस साल पूरे कर लिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में इससे करीब 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, और यह अब दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान मंच बन चुका है।

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भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में से एक, यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने अपने सफर के दस साल पूरे कर लिए हैं। मोबाइल फोन से चंद सेकंड में पैसे भेजने की यह सुविधा आज करोड़ों भारतीयों के रोज़मर्रा के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

एक छोटी सी शुरुआत से लेकर दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम भुगतान मंच बनने तक का यह सफर वाकई उल्लेखनीय रहा है। यहाँ हम आधिकारिक रूप से उपलब्ध आँकड़ों के आधार पर यूपीआई की इस दस साल की यात्रा, उसके मौजूदा आकार और उसके बढ़ते वैश्विक प्रभाव को क्रमवार ढंग से समझने की कोशिश करेंगे।

दस साल का सफर

यूपीआई की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी, और तब से लेकर अब तक इसने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में यूपीआई से होने वाले लेनदेन की संख्या में करीब 12,000 गुना की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जो इसकी लोकप्रियता की तेज़ रफ्तार को साफ़ दर्शाती है।

शुरुआत में जहाँ इसे लेकर लोगों में थोड़ी झिझक थी, वहीं धीरे-धीरे यह भरोसे और सुविधा का दूसरा नाम बन गया। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक, और गाँव से लेकर शहर तक, आज हर जगह यूपीआई के ज़रिए भुगतान आम बात हो गई है, जिसने नकदी पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है।

आँकड़ों में यूपीआई की ताकत

यूपीआई की मौजूदा ताकत का अंदाज़ा इसके आँकड़ों से आसानी से लगाया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई के ज़रिए करीब 24,162 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रही। ये आँकड़े इसके विशाल पैमाने की एक झलक भर देते हैं।

रोज़ाना के स्तर पर देखें तो यह संख्या और भी हैरान करने वाली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस दौरान हर दिन औसतन करीब 66 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी दैनिक कीमत लगभग 0.86 लाख करोड़ रुपये रही। यह दर्शाता है कि यूपीआई अब देश की आर्थिक धड़कन का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

दुनिया में सबसे बड़ा

यूपीआई की सफलता अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरी दुनिया इसका लोहा मान रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूपीआई इस समय दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम भुगतान मंच बन चुका है, और यह दुनिया भर में होने वाले तत्काल डिजिटल लेनदेन में से करीब आधे अकेले ही संभालता है।

घरेलू स्तर पर भी इसका दबदबा बेमिसाल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भारत में होने वाले कुल डिजिटल भुगतान की मात्रा में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है। यह किसी एक भुगतान प्रणाली के लिए एक असाधारण उपलब्धि है, जो इसकी गहरी पैठ को दर्शाती है।

छोटे भुगतान, बड़ा असर

डिजिटल भुगतान ने रोज़मर्रा की खरीदारी को आसान बना दिया है। प्रतीकात्मक तस्वीर।
डिजिटल भुगतान ने रोज़मर्रा की खरीदारी को आसान बना दिया है। प्रतीकात्मक तस्वीर।

यूपीआई की सबसे खास बात यह है कि इसने छोटे-छोटे भुगतानों को भी बेहद आसान बना दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूपीआई से होने वाले कुल लेनदेन में से करीब 63 प्रतिशत भुगतान दुकानदारों को किए जाते हैं, और इनमें से करीब 86 प्रतिशत लेनदेन तो 500 रुपये से भी कम राशि के होते हैं।

वहीं, अगर लेनदेन की कुल कीमत की बात करें, तो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजी जाने वाली राशि की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत रहती है। इन आँकड़ों से साफ़ है कि यूपीआई ने बड़े और छोटे, दोनों ही तरह के भुगतानों को एक ही सरल मंच पर बखूबी समेट लिया है।

सीमाओं के पार पहुँच

यूपीआई की पहुँच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस समय देश के 703 से भी अधिक बैंक इस प्रणाली से जुड़े हुए हैं, जिससे करोड़ों उपभोक्ता आसानी से एक-दूसरे को भुगतान कर पाते हैं। यह व्यापक नेटवर्क ही इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।

उल्लेखनीय है कि यूपीआई की यह सुविधा अब भारत की सीमाओं से बाहर भी अपने कदम रख चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह प्रणाली अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस और नेपाल जैसे देशों में भी काम कर रही है, जो भारत की डिजिटल तकनीक की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

डिजिटल भारत की रीढ़

कुल मिलाकर, यूपीआई का यह दस साल का सफर भारत की डिजिटल क्रांति की एक शानदार मिसाल है। जिस तरह इसने आम लोगों के लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि यूपीआई आज सही मायनों में डिजिटल भारत की एक मज़बूत रीढ़ बन चुका है।

5 responses

यूपीआई: कहीं और से बेहतर बताया.

3

यूपीआई पर संतुलित नज़रिया.

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इशा राव 2026-09-04 · 4 min read · 578 reads
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